26 जनवरी रिपब्लिक डे सेल 2026: भारतीय हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पादों पर बंपर छूट

भारत का इतिहास, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्य 26 जनवरी को एक साथ जीवंत हो उठते हैं। गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संविधान और स्वशासन की शक्ति का उत्सव है। वर्ष 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि हमारा लोकतंत्र समय के साथ परिपक्व, सशक्त और आत्मनिर्भर बना है।

आज के आधुनिक भारत में गणतंत्र दिवस का उत्साह केवल परेड और समारोहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वोकल फॉर लोकल, स्वदेशी सामान की खरीदारी और भारतीय हैंडलूम–हस्तशिल्प को अपनाने का एक बड़ा अवसर भी बन चुका है। इसी भावना के साथ गणतंत्र दिवस सेल 2026 में भारतीय हैंडमेड उत्पादों पर बंपर छूट देखने को मिलती है।

गणतंत्र दिवस का अर्थ और हम इसे क्यों मनाते हैं

“गणतंत्र” शब्द का अर्थ है – जनता द्वारा चुनी गई सरकार, जहाँ सर्वोच्च शक्ति जनता के पास होती है।
26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना स्वयं का संविधान लागू किया और ब्रिटिश शासन के कानूनों से पूर्ण रूप से मुक्त होकर एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

हम गणतंत्र दिवस इसलिए मनाते हैं क्योंकि:

  • यह हमें हमारे संविधान के मूल्यों की याद दिलाता है
  • यह नागरिकों को समान अधिकार और कर्तव्यों का बोध कराता है
  • यह राष्ट्रीय एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक सोच को मजबूत करता है

यह दिन हमें यह समझाता है कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।

गणतंत्र दिवस पर होने वाली प्रमुख गतिविधियाँ

गणतंत्र दिवस पूरे भारत में बड़े ही गर्व, सम्मान और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारत के संविधान के लागू होने की स्मृति में मनाया जाता है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, एकता और संप्रभुता का प्रतीक है। इस अवसर पर पूरे देश में अनेक प्रकार की भव्य और प्रेरणादायक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

1. भव्य परेड

नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड इस उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण होती है। इस परेड में भारत की तीनों सेनाएँ — थल सेना, नौसेना और वायुसेना — अपनी अनुशासन, साहस और शक्ति का शानदार प्रदर्शन करती हैं।

परेड के दौरान देश के अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, टैंकों और सैन्य टुकड़ियों को प्रदर्शित किया जाता है, जो भारत की मजबूत रक्षा प्रणाली और सामरिक क्षमता को दर्शाते हैं। वायुसेना के लड़ाकू विमानों की रोमांचक फ्लाई-पास्ट लोगों में देशभक्ति का जोश भर देती है। यह परेड देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सैन्य शक्ति का सजीव प्रतीक होती है।

2. राज्यों की झांकियाँ

गणतंत्र दिवस परेड में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियाँ भी विशेष आकर्षण का केंद्र होती हैं। प्रत्येक झांकी उस राज्य की संस्कृति, इतिहास, लोक कला, परंपराओं और उपलब्धियों को दर्शाती है।

इन झांकियों में पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, लोक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को खूबसूरती से प्रस्तुत किया जाता है। इससे भारत की “एकता में विविधता” की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और दर्शकों को देश की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान से परिचित होने का अवसर मिलता है।

3. सांस्कृतिक कार्यक्रम

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। विशेष रूप से स्कूली बच्चे और कलाकार देशभक्ति गीतों, नृत्यों, नाटकों और समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की गौरवशाली परंपरा और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हैं।

ये कार्यक्रम लोगों के मन में राष्ट्रप्रेम, एकता और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करते हैं। बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियाँ दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं और आने वाली पीढ़ी में देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का महत्व

गणतंत्र दिवस के अवसर पर जब राष्ट्रगान “जन गण मन” की मधुर धुन पूरे वातावरण में गूंजती है, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है और हृदय देशभक्ति की भावना से भर उठता है। राष्ट्रगान हमारे देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। इसे विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर ने रचा था। राष्ट्रगान में भारत के विभिन्न प्रदेशों और जनसमूहों का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि विविधताओं से भरा हमारा देश एक मजबूत सूत्र में बंधा हुआ है।

राष्ट्रगान के समय खड़े होकर सम्मान प्रकट करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह हमें अनुशासन, सम्मान और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का भाव सिखाता है।

वहीं राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्”, जिसे महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा, मातृभूमि के प्रति प्रेम, त्याग और बलिदान की भावना को प्रकट करता है। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। “वंदे मातरम्” का अर्थ है — मैं मातृभूमि को नमन करता हूँ — जो देश को माँ के रूप में देखने की हमारी सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों ही हमारे स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत की आत्मा हैं। ये रचनाएँ हमें अपने देश के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती हैं और नागरिकों में राष्ट्रप्रेम, एकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती हैं।

इस प्रकार, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत न केवल गीत हैं, बल्कि हर भारतीय की भावना, पहचान और आत्मसम्मान के प्रतीक हैं। 

भारत के पहले प्रधानमंत्री और ऐतिहासिक तथ्य

जब भारत 26 जनवरी 1950 को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना, तब देश के शासन की बागडोर महान नेताओं के हाथों में थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। वे आधुनिक भारत के निर्माता माने जाते हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने लोकतंत्र, औद्योगिक विकास, वैज्ञानिक सोच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान की मजबूत नींव रखी।

उसी समय डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने। वे एक विद्वान, सरल और आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने संविधान की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गणतंत्र दिवस सेल 2026 और ऑनलाइन ऑफ़र

  • आज का गणतंत्र दिवस केवल राष्ट्रीय समारोह नहीं, बल्कि स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का उत्सव बन चुका है।
  • इस अवसर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर विशेष गणतंत्र दिवस सेल 2026 आयोजित की जाती है।
  • गणतंत्र दिवस सेल के दौरान हैंडलूम साड़ियाँ आकर्षक छूट पर उपलब्ध होती हैं।
  • खादी वस्त्र पर विशेष ऑफ़र दिए जाते हैं, जो स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देते हैं।
  • हस्तनिर्मित ज्वेलरी पर छूट मिलती है, जिससे पारंपरिक कारीगरी को प्रोत्साहन मिलता है।
  • लकड़ी, टेराकोटा और धातु से बने हस्तशिल्प किफायती दामों पर उपलब्ध होते हैं।
  • घर सजाने के लिए होम डेकोर आइटम्स पर भी विशेष ऑफ़र मिलते हैं।
  • उपहार देने के लिए सुंदर गिफ्ट आइटम्स पर आकर्षक छूट दी जाती है।
  • ये ऑनलाइन ऑफ़र उपभोक्ताओं को भारतीय उत्पादों को चुनने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • इस प्रकार गणतंत्र दिवस सेल 2026 स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उद्योगों को समर्थन प्रदान करती है।

सरकारी पहल और Indiahandmade

भारत सरकार ने देश के कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्प शिल्पकारों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएँ और पहलें शुरू की हैं। इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक कला और हस्तकला को जीवित रखना, कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें आधुनिक बाज़ार से जोड़ना है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है Indiahandmade।

Indiahandmade भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) की एक विशेष पहल है, जिसे Digital India Corporation द्वारा डिज़ाइन और विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म डिजिटल तकनीक के माध्यम से कारीगरों और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है, जिससे कारीगरों को अपने उत्पादों का उचित और न्यायसंगत मूल्य प्राप्त होता है और उनकी मेहनत का सही सम्मान होता है।

Indiahandmade के माध्यम से उपभोक्ताओं को प्रामाणिक हैंडलूम, खादी और हस्तशिल्प उत्पाद सीधे कारीगरों से प्राप्त होते हैं। यह न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देता है, बल्कि “वोकल फॉर लोकल” और आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी सशक्त करता है।

गणतंत्र दिवस सेल 2026 के दौरान Indiahandmade प्लेटफॉर्म स्वदेशी खरीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित करता है, जिससे लोग गर्व के साथ भारतीय उत्पादों को अपनाते हैं। इस प्रकार, Indiahandmade केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि कारीगरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की एक प्रभावशाली सरकारी पहल है। 

वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी सामान की खरीदारी

  • वोकल फॉर लोकल केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की मजबूत नींव है। इसका उद्देश्य देश के भीतर बने उत्पादों को प्राथमिकता देना और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • जब हम स्वदेशी सामान खरीदते हैं, तो सबसे पहले स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है। इससे उनकी मेहनत को पहचान मिलती है और उनकी आजीविका सुरक्षित होती है।
  • स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीण और लघु उद्योगों को मजबूती मिलती है, जिससे गांवों की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और पलायन जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
  • स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बिक्री बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होता है और धन देश के भीतर ही बना रहता है।
  • स्वदेशी सामान अपनाने से विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होती है, जिससे आयात घटता है और भारत आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनता है।
  • गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी करना सच्ची और व्यावहारिक देशभक्ति का प्रतीक है, क्योंकि इससे हम देश के विकास में प्रत्यक्ष योगदान देते हैं।
  • इस प्रकार, वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी सामान को अपनाना न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि भारत के उज्ज्वल और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर एक सशक्त कदम भी है। 

हैंडलूम क्रांति और आधुनिक युग

  • भारत की हैंडलूम परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है, जो सिंधु घाटी सभ्यता के समय से चली आ रही समृद्ध बुनकरी कला का प्रमाण देती है।
  • हैंडलूम वस्त्र केवल कपड़े नहीं होते, बल्कि इनमें भारतीय संस्कृति, परंपरा और कारीगरों की मेहनत की झलक मिलती है।
  • बनारसी साड़ियाँ अपनी महीन बुनाई और रेशमी ज़री के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं और भारतीय विवाह परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • कांजीवरम साड़ियाँ तमिलनाडु की पहचान हैं, जो अपनी मजबूत रेशम, चमकीले रंगों और मंदिर कला से प्रेरित डिज़ाइनों के लिए जानी जाती हैं।
  • चंदेरी साड़ियाँ अपनी हल्की बनावट, पारदर्शिता और सुंदर बॉर्डर डिज़ाइन के कारण खास मानी जाती हैं।
  • इकट बुनाई कला अपनी जटिल तकनीक और ज्यामितीय डिज़ाइनों के लिए प्रसिद्ध है।
  • खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक है, जिसे महात्मा गांधी ने स्वदेशी आंदोलन का आधार बनाया।
  • आधुनिक युग में हैंडलूम को नई डिज़ाइन, फैशन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से वैश्विक पहचान मिल रही है।
  • “वोकल फॉर लोकल” और “मेड इन इंडिया” जैसे अभियानों से हैंडलूम क्रांति को नया जीवन मिला है।
  • आज की पीढ़ी हैंडलूम को पारंपरिक परिधानों के साथ-साथ आधुनिक फैशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा बना रही है।
  • इस प्रकार, हैंडलूम क्रांति परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम है, जो भारत की सांस्कृतिक पहचान और आत्मनिर्भर भविष्य को मजबूती देती है। 

आधुनिक युग में हैंडलूम की जगह 

  • आज के आधुनिक युग में हैंडलूम केवल पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह फैशन और लाइफस्टाइल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
  • प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर्स हैंडलूम को नए रंगों, डिज़ाइनों और कट्स के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे भारतीय हैंडलूम को अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर पहचान मिल रही है।
  • हैंडलूम साड़ियाँ, कुर्ते, दुपट्टे और शॉल अब फैशन शो, रेड कार्पेट और वैश्विक प्रदर्शनियों में सम्मान के साथ प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने हैंडलूम को देश-विदेश तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे कारीगर सीधे ग्राहकों से जुड़ पा रहे हैं।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से हैंडलूम की कहानियाँ, बुनकरों का संघर्ष और उनकी कला लोगों तक पहुँच रही है, जिससे इस क्षेत्र को नई पहचान मिल रही है।
  • आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक हैंडलूम वस्त्रों को आधुनिक स्टाइल, फ्यूज़न फैशन और रोज़मर्रा के पहनावे में आत्मविश्वास के साथ अपना रही है।
  • हैंडलूम को जींस, जैकेट, ड्रेसेज़ और ऑफिस वियर के साथ मिलाकर पहनना एक नया ट्रेंड बन चुका है।
  • यह बदलाव केवल फैशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, स्थिरता (sustainability) और जिम्मेदार उपभोग की सोच को भी बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक हैंडलूम क्रांति भारत की सांस्कृतिक शक्ति, रचनात्मकता और आत्मनिर्भर सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

इस प्रकार, आधुनिक युग में हैंडलूम परंपरा और नवाचार का सुंदर संगम बनकर भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत कर रहा है। 

कारीगरों का संघर्ष और हमारी जिम्मेदारी

भारतीय कारीगर:

  • सीमित संसाधनों में काम करते हैं
  • पीढ़ियों से कला को जीवित रखे हुए हैं
  • बाजार और सही कीमत की कमी से जूझते हैं

जब हम हैंडलूम और हस्तशिल्प खरीदते हैं, तो हम:

  • एक कारीगर परिवार की आजीविका सुरक्षित करते हैं
  • कला और परंपरा को जीवित रखते हैं

हस्तशिल्प उत्पादों के लाभ और महत्व

  • टिकाऊ (Durable): हस्तशिल्प उत्पाद कुशल कारीगरों द्वारा हाथों से बनाए जाते हैं, जिनमें गुणवत्ता और मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी कारण ये उत्पाद लंबे समय तक चलते हैं और वर्षों तक अपनी सुंदरता बनाए रखते हैं।
  • पर्यावरण अनुकूल (Eco-Friendly): हस्तशिल्प वस्तुओं के निर्माण में केमिकल और भारी मशीनों का न्यूनतम उपयोग होता है। अधिकतर उत्पाद प्राकृतिक कच्चे माल जैसे लकड़ी, मिट्टी, कपास, जूट और धातु से बनाए जाते हैं, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुँचता है।
  • सस्टेनेबल (Sustainable): हस्तशिल्प उद्योग प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करता है और संतुलित उपयोग को बढ़ावा देता है। यह प्रक्रिया भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने में सहायक होती है।
  • एलीगेंट और टाइमलेस (Elegant & Timeless): हस्तशिल्प उत्पाद अपनी पारंपरिक कला और सौंदर्य के कारण कभी फैशन से बाहर नहीं होते। उनकी सादगी और आकर्षण उन्हें हर युग में प्रासंगिक बनाए रखते हैं।
  • यूनिक (Unique): प्रत्येक हस्तशिल्प उत्पाद हाथ से बनाया जाता है, इसलिए कोई भी दो वस्तुएँ बिल्कुल एक जैसी नहीं होतीं। यही विशिष्टता इन्हें खास बनाती है और इनका भावनात्मक व सांस्कृतिक मूल्य बढ़ाती है।
  • सांस्कृतिक पहचान: हस्तशिल्प उत्पाद भारत की परंपरा, इतिहास और क्षेत्रीय संस्कृति को दर्शाते हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत संरक्षित रहती है।
  • कारीगरों को समर्थन: हस्तशिल्प की खरीदारी से स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है और उनकी कला को जीवित रखने में मदद मिलती है।
  • सच्ची देशभक्ति का प्रतीक: हस्तशिल्प उत्पादों को अपनाना “वोकल फॉर लोकल” और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करता है।

संस्कृति, कला और विरासत का संरक्षण

  • हैंडलूम और हस्तशिल्प भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और जीवनशैली को जीवित रखते हैं।
  • ये शिल्प हमारी लोक कला का सजीव रूप हैं, जिनमें हर क्षेत्र की अलग पहचान, रंग, डिज़ाइन और कहानी समाहित होती है।
  • हैंडलूम और हस्तशिल्प के माध्यम से भारत की समृद्ध विरासत सुरक्षित रहती है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचती है।
  • प्रत्येक बुनाई, कढ़ाई और हस्तनिर्मित वस्तु में इतिहास, परंपरा और कारीगर की भावना छिपी होती है।
  • आधुनिक समय में मशीन-निर्मित वस्तुओं के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक कलाएँ खतरे में हैं, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
  • युवा पीढ़ी को हैंडलूम और हस्तशिल्प से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पहचान सकें और उन पर गर्व कर सकें।
  • जब युवा पारंपरिक कला को अपनाते हैं, तो वे उसे नए विचारों, डिज़ाइनों और तकनीक के साथ आगे बढ़ाते हैं।
  • शिक्षा, फैशन, डिजिटल मीडिया और ई-कॉमर्स के माध्यम से युवाओं को इन कलाओं से जोड़ा जा सकता है।
  •  हैंडलूम और हस्तशिल्प का संरक्षण केवल कला की रक्षा नहीं, बल्कि भारतीय पहचान और आत्मा की रक्षा है।

इस प्रकार, संस्कृति, कला और विरासत का संरक्षण हमारे कर्तव्य के साथ-साथ देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी है।

निष्कर्ष

इस 26 जनवरी रिपब्लिक डे सेल 2026 पर आइए हम संकल्प लें कि:

  • हम स्वदेशी अपनाएँगे
  • लोकल कारीगरों का समर्थन करेंगे
  • अपनी संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाएंगे

हैंडलूम और हस्तशिल्प केवल उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की पहचान और आत्मा हैं।
जब आप एक हैंडमेड उत्पाद खरीदते हैं, तो आप भारत के इतिहास, कला और मेहनत को सम्मान देते हैं।

जय हिंद  | वोकल फॉर लोकल | सपोर्ट हैंडलूम | सपोर्ट इंडिया